नमस्कार मित्रो,
इन दिनों बहुत गर्मी है, हर तरफ लू के थपेड़े पड़ते मालूम होते हैं ! ऐसी भीषण गर्मी में बहुत अधिक प्यास लगती है ,याद करके देखिये की सुबह से शाम तक आप कितने गिलास पानी पी लेते हैं, लगभग आठ-दस गिलास तो पी ही लेते होंगे, है ना !
मित्रों, हम मनुष्य हैं, हमें परमात्मा ने वाणी दी है जिसके द्वारा हम अपनी इच्छाओं को, आवश्यकताओं को कहकर बोलकर किसी को भी बता सकते हैं की भई अब हमें खाना चाहिए, अब हमें पानी चाहिए ,
लेकिन ज़रा सोचिये जिन पशु -पक्षिओं को वाणी का वरदान नहीं मिला है , जो अपनी आवश्यकताओं को बोलकर नहीं बता सकते, ज़रा उनकी पीड़ा का अनुमान लगाइए !
मित्रों मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ की आजकल जैसी भीषण गर्मी है , ऐसी गर्मी में हजारों पशु -पक्षी भूख -प्यास से तड़प कर मर जाते हैं !
आप सभी पाठकों से निवेदन है की मानवीयतादिखाते हुए समुचित स्थान पर उनके लिए दाना -पानी रखें ! आपको इन बेजुबानों का आशीष प्राप्त होगा !
करेंगे ना , धन्यवाद !

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